ट्रेन की पटरियों पर हगने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आएंगे ?
शहरों में रोड किनारे मूतने वाला महिलाओं की निजता का ख्याल ना रखने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
सड़कों पर कचरा फैलाने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
तहसीलों में कभी भी समय पर ना आने वाला सरकारी कर्मचारी पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
पैसों के बिना आय प्रमाण पत्र ,जाति प्रमाण पत्र ,मूल निवास प्रमाण पत्र ना बनाने वाला लेखपाल पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
सरकारी अस्पतालों में बिना पैसे के गरीब का इलाज ना करने वाला डॉक्टर पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
सरकारी विद्यालयों में मोटी रकम ऐंठकर भी बच्चों को ठीक से शिक्षा ना देने वाला शिक्षक पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
गाड़ी के कागज़ पूरे होने पर भी चालान काटने की धमकी देकर रोकड़ा ऎंठने वाला पुलिस वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
शहर में आये हुये नए इंसान से दुगना ,तिगुना किराया बसूलने वाला टेम्पू चालक पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
घर में ठाली निठल्ले रहने वाला काम न करने वाला कामचोर पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
लड़कियों को गंदी नजर से देखने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
बच्चियों और 90 साल तक की बूढी औरतों को हवस का शिकार बनाने वाला बलात्कारी पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
नयी फिल्मो को मॉल में जाकर देखकर करोड़ों उड़ाने वाला युवा पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
पढ़ाई से दूर भागने वाला छात्र् पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
सड़कों पर भीख मागने वाले लूले अपाहिजों की मदद न करने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
सरकारी कॉलिज के गेट के सामने सरकारी नौकरियों के फ़र्ज़ी फॉर्म बेचकर
बेरोजगारों से रुपये ऎंठने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
मेट्रों स्टेशन में नए यात्री को टोकन देने वाला रुपयों के जंजाल में
उलझाकर कम रुपये वापस करने वाला कर्मचारी पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
शुद्ध दूध में तालाबों का गन्दा पानी मिलाकर शहरों में दूध बेचने वाला दूधिया पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
पेट्रोल पम्प पर कम पेट्रोल देने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
अपने बूढे माँ बाप को बोझ समझकर सड़कों किनारे फेंकने वाला पूछता है कि अच्छे दिन कब आयेंगे ?
अच्छे दिन चाहने वाले सभी भाई बहन बतायें कि उन्हें किस तरह के अच्छे दिन चाहिए ?
नोट : ऊपर लिखा हुआ लेख लेखक ने अपने खुद के अनुभव के आधार पर लिखा है |


1 comments:
राजू जी आपने जिन अनुभवों को शेयर किया है वह बहुत ही सही व सत्य है। वास्तव में पहले खुद को बदलो तब देश बदलेंगे। आप ऐसी ही रचनाओं को शब्दनगरी पर भी लिख सकते हैं। वहां पर भी यही है अच्छे दिन ! जैसी रचनाएँ पढ़ व् लिख सकते हैं ।
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