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Monday, March 7, 2016

सच्चा ज्ञान ही मनुष्य बनने का मूल मंत्र !

शास्त्र कहता है.....ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र कोई जन्म से नहीं होता और न ही जन्म से कोई उच और नीच होता है, और ये भी कहता है कि जन्म से तो सभी शूद्र होता है .....
....तो फिर आज कोई कैसे जन्म से ही ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य हो जाता है?
क्या ऐसे लोग वेदोँ को मानते हैं ?
अगर नहीं तो फिर वेदिक धर्म को मानते हैं??
कतई नहीं...
सिर्फ एक ही धर्म को मानते हैं...बेईमानी, झूठ, व्यभिचार...
जिससे कायम रहे उनकी भय,भुत और भ्रम पर आधारित क्षद्म धार्मिक सत्ता जो धर्म के नाम पर आधारित क्रमिक असमानता कायम रखने के लिए अधार्मिक सत्ता है।
ऐसे लोग धार्मिक नहीं अधर्मी हैं?
सात्विक नहीं बेईमान और व्यभिचारी हैं।
क्योंकि सही ज्ञान पर सबों का जन्म से बराबरी का अधिकार हो यही धर्म है।
सबों को सम्मान से जीने का एक समान अधिकार हो यही धर्म है.....
अर्थात सत्य के राह पर चलकर सबों को उनका बराबरी का अधिकार मिले यही सच्चा धर्म है।
सच्चा ज्ञान ही मनुष्य बनने का मूल मंत्र!

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