आज सारी दुनिया जिस मुल्क को, जिस मुल्क की तरक़्क़ी को आदर और सम्मान के
साथ देख रही है, वह भारत है. लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान में सब कुछ मिलता
है, जी हां हमारे पास सब कुछ है. लेकिन हमें यह कहते हुए शर्म भी आती है और
अफ़सोस भी होता है कि हमारे पास ईमानदारी नहीं है. हमारी रोज़मर्रा की
ज़िंदगी में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक उतर चुका है और किस तरह से बेईमानी
एक राष्ट्रीय मजबूरी बनकर हमारी नसों में समा चुकी है महंगाई, ग़रीबी, भूख
और बेरोज़गारी जैसे अहम मुद्दों से
रोज़ाना और लगातार जूझती देश की अवाम के सामने भ्रष्टाचार इस वक्त सबसे
बड़ा मुद्दा और सबसे खतरनाक बीमारी है. अगर इस बीमारी से हम पार पा गए तो
यकीन मानिए सोने की चिड़िया वाला वही सुनहरा हिंदुस्तान एक बार फिर हम सबकी
नजरों के सामने होगा. पर क्या ऐसा हो पाएगा? क्या आप ऐसा कर पाएंगे? मंदिर
में दर्शन के लिए, स्कूल अस्पताल में एडमिशन के लिए, ट्रेन में रिजर्वेशन
के लिए, राशनकार्ड, लाइसेंस, पासपोर्ट के लिए, नौकरी के लिए, रेड लाइट पर
चालान से बचने के लिए, मुकदमा जीतने और हारने के लिए, खाने के लिए, पीने के
लिए, कांट्रैक्ट लेने के लिए, यहां तक कि सांस लेने के लिए भी आप ही तो
रिश्वत देते हैं. अरे और तो और अपने बच्चों तक को आप ही तो रिश्वत लेना और
देना सिखाते हैं. इम्तेहान में पास हुए तो घड़ी नहीं तो छड़ी.अब आप ही
बताएं कि क्या गुनहगार सिर्फ नेता, अफसर और बाबू हैं? आप एक बार ठान कर तो
देखिए कि आज के बाद किसी को रिश्वत नहीं देंगे. फिर देखिए ये भ्रष्टाचार और
भ्रष्टाचारी कैसे खत्म होते हैंआंकड़े कहते हैं कि 2009 में भारत में
अपने-अपने काम निकलवाने के लिए 54 फीसदी हिंदुस्तानियों ने रिश्वत दी.
आंकड़े कहते हैं कि एशियाई प्रशांत के 16 देशों में भारत का शुमार चौथे
सबसे भ्रष्ट देशों में होता है. आंकड़े कहते हैं कि कुल 169 देशों में
भ्रष्टाचार के मामले में हम 84वें नंबर पर हैं. आंकड़े ये भी बताते हैं कि
1992 से अब तक यानी महज 24 सालों में देश के 82 लाख करोड़ रुपए घोटाले की
भेंट चढ़ गए. इतनी बड़ी रकम से हम 2 करोड़ 40 लाख प्राइमरी हेल्थसेंटर बना
सकते थे. करीब साढ़े 14 करोड़ कम बजट के मकान बना सकते थे. नरेगा जैसी 90
और स्कीमें शुरू हो सकती थीं. करीब 61 करोड़ लोगों को नैनो कार मुफ्त मिल
सकती थी. हर हिंदुस्तानी को 56 हजार रुपये या फिर गरीबी की रेखा से नीचे रह
रहे सभी 40 करोड़ लोगों में से हर एक को एक लाख 82 हजार रुपये मिल सकते
थे. यानी पूरे देश की तस्वीर बदल सकती थी I

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